शनि की साढे साती
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ज्योतिष के अनुसार शनि की साढेसाती की मान्यतायें तीन प्रकार से होती हैं, पहली लगन से दूसरी चन्द्र लगन या राशि से और तीसरी सूर्य लगन से, उत्तर भारत में चन्द्र लगन से शनि की साढे साती की गणना का विधान प्राचीन काल से चला आ रहा है।
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इस मान्यता के अनुसार जब शनिदेव चन्द्र राशि पर गोचर से अपना भ्रमण करते हैं तो साढेसाती मानी जाती है, इसका प्रभाव राशि में आने के तीस माह पहले से और तीस माह बाद तक अनुभव होता है।
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हालांकि पौराणिक सुझाव श्री हनुमान की भक्ति करने का है, क्योकि शनि देव ने हनुमान जी को वरदान दिया था कि हनुमान भक्तों पर शनि की वक्र दृष्टि नहीं पड़ेगी।
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शनि की साढ़ेसाती के लिए मंत्र जाप
ॐ शन्नो देवी रभिष्टय आपो भवन्तु पीपतये शनयो रविस्र वन्तुनः।
इस मंत्र का जप करने से शनि की साढ़ेसाती का बुरा असर खत्म हो जाता है। ध्यान रखें कि 23,000 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
शनि की साढे साती ज्योतिषीय एवं पौराणिक मान्यता
ज्योतिष के अनुसार शनि की साढेसाती की मान्यतायें तीन प्रकार से होती हैं, पहली लगन से दूसरी चन्द्र लगन या राशि से और तीसरी सूर्य लगन से, उत्तर भारत में चन्द्र लगन से शनि की साढे साती की गणना का विधान प्राचीन काल से चला आ रहा है।
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इस मान्यता के अनुसार जब शनिदेव चन्द्र राशि पर गोचर से अपना भ्रमण करते हैं तो साढेसाती मानी जाती है, इसका प्रभाव राशि में आने के तीस माह पहले से और तीस माह बाद तक अनुभव होता है।
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हर मनुष्य को तीस साल मे एक बार साढेसाती अवश्य आती ह.
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कोई नया काम, नया उद्योग, भूल कर भी साढेसाती में नही करना चाहिये, शनि के इस समय का विचार पहले से कर लिया गया है तो धन की रक्षा हो जाती है।
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श्री शनि बीज मंत्र
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ॐ शं शनैश्चरायै नम:
ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: ।।
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इस मंत्र का जाप शनिवार को ही करें। साढ़ेसाती के भय से मुक्ति पाने का सबसे आसान उपाय है ह।
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श्री शनि पौराणिक मंत्र
श्री नीलांजन समाभासं, रवि पुत्रं यमाग्रजम।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं, तं नमामि शनैश्चरम ।।
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इस मंत्र का जाप करने से शनि की अतिशीघ्र प्रसन्नता प्राप्त होती है।